भगवान शिव के नाम से महेश नवमी का महत्व: जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। 

भगवान शिव को महेश के नाम से भी जाना जाता है। महेश नाम से ही माहेश्वरी समाज का नामकरण हुआ है। यही कारण है कि हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर महेश नवमी मनाई जाती है। महेश नवमी के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में आपको सफलता प्राप्त होती है।  माहेश्वरी समाज में महेश नवमी का बड़ा महत्व है। हालांकि भगवान शिव के सभी भक्त इस दिन महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना कर सकते हैं।  इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति, धन और सौभाग्य में बढ़ोत्तरी का वरदान प्राप्त होता है। 

महेश नवमी 2024 तिथि और पूजा मुहूर्त 
महेश नवमी का पावन पर्व हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में 15 जून को यह तिथि है। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 14 तारीख की रात्रि में 12 बजकर 5 मिनट से हो जाएगा और 15 तारीख की देर रात 2 बजकर 34 मिनट तक यह तिथि व्याप्त रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार 15 जून को ही महेश नवमी मनाई जाएगी। इस दौरान पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 15 जून सबुह 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना आपके लिए हितकारी साबित होगा।  

महेश नवमी का महत्व 
मान्यताओं के अनुसार महेश नवमी के दिन भगवान महेश और मां पार्वती ने ऋषियों के श्राप से पत्थर हो चुके 72 क्षत्रियों को शाममुक्त किया था। इसके बाद उन क्षत्रियों को माता पार्वती ने आशीर्वाद दिया था कि तुम्हारे कुल पर हमारी छाप रहेगी और तुम्हारा वंश माहेश्वरी के नाम से जाना जाएगा। इसलिए माहेश्वरी समाज में महेश नवमी के दिन भगवान शिव की पूजा आराधना का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के महेश रूप की आराधना करने से दुख और विपदाओं से मुक्ति मिल जाती है। 

पूजा विधि 
महेश नवमी के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। इस दिन सुबह स्नान ध्यान के बाद आपको स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को चंदन, पुष्प, गंगाजल इत्यादि अर्पित करने चाहिए और पूजन आरंभ करना चाहिए। पूजने के दौरान शिव चालीसा का पाठ आप कर सकते हैं। इसके साथ ही शिव मंत्रों का जप करने से भी आपको लाभ प्राप्त होता है। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती आपको करनी चाहिए। पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद का वितरण करें। इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को फलाहार करना चाहिए और गलती से भी दिन के समय नहीं सोना चाहिए। महेश नवमी के दिन दान-पुण्य करना करने से भी शिव कृपा आपको प्राप्त होती है। 

 

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