आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है बकरीद का त्यौहार।
ईद उल-फित्र और ईद उल-अज़हा इस्लामी धर्म के महत्वपूर्ण त्योहार हैं। इस बार बकरा ईद 17 जून यानी आज मनाई जा रही है। और इन्हें बड़े ही ख़ुशी के साथ मनाया जाता है। ये दोनों ही ईद वर्षा बाद आते हैं और मुस्लिम समुदाय में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाए जाते हैं।ईद उल-फित्र चाँद रात ईद उल-फित्र रमज़ान के महीने के बाद मनाई जाती है। यह त्योहार रमज़ान के रोज़ों की ताकत का अंजाम होता है और इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रोज़ा तोड़ने के बाद खुशी के इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं, मिठाई खाते हैं और एक दूसरे को तोहफे भी देते हैं। ईद उल-अज़हा बकरीद ईद उल-अज़हा भी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है और इसे 'बकरीद' भी कहते हैं। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग बकरी को भी त्याग देते हैं और उसका मांस गरीबों को भांडार किया जाता है। यह ईद अल्लाह के वचन को याद दिलाने का भी एक मौका होता है। इन दोनों ईदों के महत्वपूर्ण अंग हैं, जो समाज में सद्भावना, समरसता और खुशी लाते हैं। इन त्योहारों को अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताने से और उन्हें अच्छे तरीके से मनाने से हमारी दिनचर्या में और भी खासियत आती है।
बकरीद या ईद-उल-अज़हा मनाने के ख़ास माकसद अल्लाह की इबादत यह त्योहार इस्लामी समाज में अल्लाह की बंदगी और उसके प्रेरक मुबारक बातों की याद दिलाने का एक मौका होता है।बकरीद एक बड़े पैमाने पर व्यापारिक गतिविधि का भी प्रमुख मौका होता है, जिसमें बकरे और बकरियों की ख़रीददारी और बेचारी होती है।बकरीद के माध्यम से समाज में समरसता और एकता को बढ़ावा दिया जाता है, क्योंकि लोग एक-दूसरे के साथ मिलजुलकर इसे मनाते हैं।
इस त्योहार में गरीबों को भी ख़ास मदद मिलती है, क्योंकि लोग उन्हें बकरीद के मौके पर मांस और अन्य आवश्यक वस्त्र-सामग्री भेंट करते हैं। बकरीद इस्लामी धर्म की महत्वपूर्ण परंपरागत रीति-रिवाज़ का हिस्सा है, जो समुदाय में सद्भावना, समरसता और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देती है। बकरीद को एक ख़ास और महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहार बनाते हैं।
















































































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