जाने आषाढ़ माह की अमावस्या का महत्व, तिथि और मुहूर्त और पितृ तर्पण के लाभ।
आषाढ़ माह की अमावस्या भारतीय पंचांग में महत्वपूर्ण होती है। यह अमावस्या वर्ष के आधे माह आषाढ़ के मासिक अंत को दर्शाती है और आमतौर पर जुलाई-अगस्त के बीच आती है। इस मास की अमावस्या पर लोग ध्यान देते हैं क्योंकि इस दिन के पुण्य कार्यों में लोग दान-दानाएं करते हैं, स्नान करते हैं और मानसिक शुद्धि के लिए विशेष ध्यान देते हैं। यह अमावस्या वैदिक संस्कृति में महत्वपूर्ण है, और इसे बरसाती ऋतु के आगमन के रूप में भी देखा जाता है। इस दिन को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर और पूजन करके गुजारती हैं। इस दिन शिव पूजा, विष्णु पूजा, हनुमान पूजा, गायत्री मंत्र का जाप और पीपल वृक्ष की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
आषाढ़ अमावस्या की तिथि और मुहूर्त
तिथि 5 जुलाई 2024 (शुक्र्वार)
अमावस्या तिथि प्रारंभ 4 जुलाई 2024 (शनिवार) शाम 6:28 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त 5 जुलाई 2024 (रविवार) शाम 7:07 बजे तक।
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
आषाढ़ अमावस्या का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। इस अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करने उपरांत दान करने का बहुत फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों के लिए अनुष्ठान दर्पण और पूजा अर्चना की जाती है। किसी पवित्र नदी में स्नान करने उपरांत दान करने का कई गुना फल प्राप्त होता है। ऊपर बताई गई चीजों का दान करने से मनुष्य को कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिलता है और घर में सुख समृद्धि आती है। पितरों के लिए तर्पण करने के उपरांत दान करने घर में पितृ दोष दूर होता है।
अमावस्या के दिन पितृ तर्पण के लाभ
अपने पितृ देवताओं को अगर आप तर्पण देना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे सही समय सुबह का ही माना जाता है। सूर्योदय के बाद 9 बजे तक आप तर्पण कार्य, दान-पुण्य कर सकते हैं। सही समय पर श्रद्धापूर्वक अगर आप पितरों का तर्पण करते हैं तो आपके जीवन की बड़े से बड़ी परेशानी दूर हो सकती है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष है वो भी इसके बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। पितरों का तर्पण करने से मानसिक और शारीरिक बदलाव आपको देखने को मिल सकते हैं। पितृ देवताओं का आशीर्वाद आपको करियर और आर्थिक मोर्चे पर भी सफलता दिलाता है।
















































































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