आज मनाई जा रही है 'आषाढ़ अमावस्या' जाने पूजा के शुभ मुहूर्त के साथ पूजा विधि। 

सनातन धर्म में आषाढ़ अमावश्या का बहुत ही बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस माह में श्री हरि की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। पितरों को खुश करने के लिए भी यह माह बहुत खास माना जाता है। माना जाता है कि इस माह में श्री हरि की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। पितरों को खुश करने के लिए भी यह माह बहुत खास माना जाता है। अमावस्या की दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान किया जाता है, मान्यता है इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वंश में वृद्धि होती है। पितृ दोष, कालसर्प दोष और शनि दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या खास मानी गई है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। किसानों के लिए ये दिन बहुत खास होता है, इसलिए इस दिन विशेष तौर पर धरती माता की पूजा की जाती है। 

आषाढ़ अमावस्या 2024 मुहूर्त 
आषाढ़ अमावस्या 5 जुलाई 2024 को मनाई जाएगी। 
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04.08 - सुबह 04.48
श्राद्ध का समय - सुबह 11.30 - दोपहर 12.54 (इस समय को कुतुप काल कहा जाता है)

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि
* इस दिन सुबह जल्दी उठ कर घर की साफ- सफाई करें।
* फिर किसी पवित्र नदी में स्नान करें, संभव न हो तो नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
* इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और भगवान विष्णु की उपासना करें।
* अब फूल, धूप, दीप और अगरबत्ती से भगवान विष्णु की पूजा करें।
* फिर स्नान-ध्यान करने के बाद पितरों का तर्पण करें।
* पूजा के दौरान विष्णु जी के मंत्रों का जाप और आरती करें।
* अंत में अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

 

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