जाने सावन के महीने में शिव की पूजा करने का महत्व।
सावन का महीना आ चूका है। शिव भगतो का त्यौहार आ चूका है। शिव भगत भगवन शिव को प्रस्सन करने के लिए कावड़ यात्रा पर जाते है। ऐसे में हर कोई भगवन शिव को प्रसन करना चाहता है। भगवन शिव की कृपा अपने ऊपर भरसवाना चाहता है। भगवन शिव को खुश करने का सबसे अच्छा महीना सावन का ही होता है। ऐसे में आप कोई भी भूल न करे और पूरे विधि विधान से शिव जी की पूजा करे और उन्हें प्रसन करे। सावन में शिवलिंग का जलाभिषेक खड़े होकर न करें. शिव जी को बैठकर जल चढ़ाना चाहिए। ,जल चढ़ाने के लिए तांबे के लौटे का ही इस्तेमाल करें। जो लोग पैकेट वाले दूध से शिव जी का अभिषेक करते हैं वह चांदी या पीतल के लौटे का उपयोग करें, इसके लिए तांबे के लौटे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मदार अर्थात नीला या सफेद अकाव। शिव जी का पसंदीदा रंग सफेद है इसलिए उनकी पूजा में सफेद आक के फूल जरुर चढ़ाना चाहिए। इसे, आंकड़ा, अर्क और अकौआ के नाम से भी जाना जाता है। भगवान भोलेनाथ को सावन में ये फूल अर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सावन में शिव पूजा का महत्व
भगवान शिव की पूजा करने से सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है और शनि दोष भी दूर रहता है। सावन में सोमवार और मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। सोमवार का दिन शिव जी को समर्पित माना गया है और इस दिन शिवलिंग की विशेष पूजा का विधान है। सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की आराधना करने और व्रत रखने से मनोवांछित फल मिलता है और विशेष फलों की प्राप्ति होती है। अगर आप भी सावन में भगवान शिव की को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सही विधि, पूजा सामग्री और नियमों का पता होना बेहद जरूरी है। ऐसे में आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि सावन सोमवार के दिन शिवजी की पूजा विधि क्या है, कौन सी पूजा सामग्री चाहिए और पूजा का सही क्रम क्या है।
















































































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