हरियाली तीज की शुभकामनाएं, माता पार्वती की कथा, पूजा विधि और व्रत के लाभ।
आप सभी को हरिलयाली तीज की हार्दिक शुभकामनाये, आज देश भर में हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जा रहा है। इसे मधुश्रवा तृतीया या छोटी तीज के नाम से भी जाना जाता है। ये दिन महिलाओं के लिये भी विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं सज-संवरकर झूला झूलती हैं और सावन के प्यारे लोकगीत गाती हैं। इस दिन हाथों में मेहंदी लगाने की भी परंपरा है। इसके साथ ही कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिनको इस दिन करने से आपके जीवन में सुख-शांति आती है और हर क्षेत्र में आप सफल होने लगते हैं। त्योहार बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष दिन पर सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मत है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। हरियाली तीज की पूजा के दौरान माता पार्वती की आरती के द्वारा आप अपने वैवाहिक जीवन में खुशियां ला सकते हैं।
हरियाली तीज व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस कड़ी तपस्या से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। कथा के अनुसार माता गौरी ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया था. माता पार्वती बचपन से ही शिव को वर के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया। एक दिन नारद जी पहुंचे और हिमालय से कहा कि पार्वती के तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनसे विवाह करना चाहते हैं. यह सुन हिमालय बहुत प्रसन्न हुए। दूसरी ओर नारद मुनि विष्णुजी के पास पहुंच गए और कहा कि हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे कराने का निश्चय किया है। इस पर विष्णुजी ने भी सहमति दे दी। नारद इसके बाद माता पार्वती के पास पहुंच गए और बताया कि पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय कर दिया है। यह सुन पार्वती बहुत निराश हुईं और पिता से नजरें बचाकर सखियों के साथ एक एकांत स्थान पर चली गईं। घने और सुनसान जंगल में पहुंचकर माता पार्वती ने एक बार फिर तप शुरू किया। उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और उपवास करते हुए पूजन शुरू किया।
भगवान शिव इस तप से प्रसन्न हुए और मनोकामना पूरी करने का वचन दिया। इस बीच माता पार्वती के पिता पर्वतराज हिमालय भी वहां पहुंच गये। वह सत्य बात जानकर माता पार्वती की शादी भगवान शिव से कराने के लिए राजी हो गये। शिव इस कथा में बताते हैं कि बाद में विधि-विधान के साथ उनका पार्वती के साथ विवाह हुआ। शिव कहते हैं, हे पार्वती! तुमने जो कठोर व्रत किया था उसी के फलस्वरूप हमारा विवाह हो सका। इस व्रत को निष्ठा से करने वाली स्त्री को मैं मनवांछित फल देता हूं।
















































































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