पुत्रदा एकादशी के दिन चावल खाना क्यों है वर्जित जाने इसकी बड़ी वजह और कारण !
एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाता है। एकादशी तिथि जगत क्र पालनहार भगवान को समर्पित है। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाता है। इसके साथ ही धार्मिक मान्यताओ के अनूसार इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति और बच्चे की तरक्की से जुड़ी सभी मुश्किलों का अंत होता है। एकादशी के दिन चावल का सेवन करना बिल्कुल ही वर्जित है। ऐसा क्यों हम आपको बताते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति पुत्रदा एकादशी पर चावल का सेवन करते हैं, उन्हें अगला जन्म रेंगने वाले जीव की योनि में मिलता है। इस बात का उल्लेख विष्णु पुराण में किया गया है। पुत्रदा एकादशी के दिन चावल खाने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। इसलिए ही ऐसा कहाँ व माना जाता है की हमे एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
पुत्रदा एकादशी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त
सावन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 15 अगस्त को सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर प्रारंभ हो रही है। वहीं, यह तिथि 16 अगस्त को सुबह 09 बजकर 39 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत शुक्रवार, 16 अगस्त 2024 को किया जाएगा। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।17 अगस्त को पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण करने का समय सुबह 05 बजकर 51 मिनट से लेकर 08 बजकर 05 मिनट के बीच में कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी के दिन ब्रम्हा मुहूर्त में उठें और स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। अब सूर्य देव को जल अर्पित करें। चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान करें। उनका अभिषेक करें। पीला वस्त्र अर्पित करें और मां लक्ष्मी को सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। देसी घी का दीपक जलाकर धनिया की पंजीरी, पंचामृत, पीले फल और मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही फल और मिठाई को भी भोग में शामिल कर सकते हैं। पूजा के दौरान मंत्रों और चालीसा का पाठ करें। अंत लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
















































































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