कजरी तीज का व्रत होता है बेहद खास, जाने इसके बारे में पूर्ण जानकारी। 

कजरी तीज भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। खासकर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में कजरी तीज धूमधाम से मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह त्योहार कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में कजरी तीज 22 अगस्त को होगी। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं। इसके अलावा, अविवाहित लोग भी इस व्रत को मनाते हैं, क्योंकि इसे योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सबसे पहले माता पार्वती ने कजरी तीज का व्रत रखा था। माता पार्वती ने 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। चूंकि माता पार्वती ने सबसे पहले कजरी तीज का व्रत किया था, इसलिए आज भी अविवाहित महिलाएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। 

कजरी तीज के व्रत में महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करतीं। इस व्रत को रखने का मुख्य उद्देश्य पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि की कामना करना है। इस व्रत का पालन करनी वाली महिलाएं लाल, हरे, या पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं और साथ ही सोलह श्रृंगार करती हैं। कजरी तीज का व्रत महिलाओं द्वारा किया जाता है, लेकिन पुरुष भी इसे अपनाकर शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह व्रत पारिवारिक सुख-समृद्धि, शारीरिक और मानसिक बल प्रदान करता है। विधिपूर्वक पालन करने से करियर और सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इसके साथ जरूरतमंदों की मदद और धार्मिक पूजन करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। 

 

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