आज देश में बनाया जा रहा है वर्ल्ड रेबीज डे', जाने इसको मनाने के कारण।
भारत में रेबीज के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं, और हैरानी की बात यह है कि 15 साल से कम उम्र के बच्चे इस बीमारी का सबसे बड़ा शिकार होते हैं। जागरूकता की कमी के कारण हर साल 28 सितंबर को 'वर्ल्ड रेबीज डे' मनाया जाता है, ताकि लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल सके। रेबीज का वायरस, जिसे लासा कहा जाता है, कुत्ते की लार में पाया जाता है। जब कुत्ता किसी व्यक्ति को काटता है, तो यह वायरस उसके शरीर में फैल जाता है। यदि कुत्ते के काटने के 24 घंटों के अंदर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लिया गया, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। यह ध्यान देने योग्य है कि रेबीज केवल कुत्ते के काटने से नहीं फैलता। वास्तव में, इसका वायरस कई अन्य जानवरों में भी मौजूद होता है, जैसे कि बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी, नेवला और सियार। यदि इनमें से कोई भी जानवर आपको काटता है, तो आपको तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए, क्योंकि इलाज में लापरवाही बरतने से व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
रेबीज के लक्षण,
1 बुखार: हल्का बुखार शुरू हो सकता है।
2 सिरदर्द: तेज सिरदर्द महसूस हो सकता है।
3 थकान: शरीर में कमजोरी और थकान का अनुभव।
4 गले में खराश: गले में दर्द या खराश।
5 पेशाब में कठिनाई: पेशाब करने में परेशानी।
6 चिंता और उत्तेजना: मानसिक तनाव और उत्तेजना का अनुभव।
7 पानी से डर: पानी देखने पर या पीने में डर लगना (हाइड्रोफोबिया)।
8 भ्रम: मानसिक स्थिति में बदलाव, जैसे भ्रम या अजीब व्यवहार।
9 पैरालिसिस: अंत में, शारीरिक कमजोरी और पैरालिसिस भी हो सकता है।
















































































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