नवरात्रि में माँ दुर्गा की आराधना और चैत्र-शारदीय उत्सवों का विशेष महत्व।
नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा को समर्पित है और इसे हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। नवरात्रि का महीना हिन्दुधर्म में बहुत खास माना गया है। नवरात्रि के दौरान नवदुर्गा की उपासना की जाती है, जिसमें भक्त माता की विभिन्न रूपों में आराधना करते हैं। यह पावन पर्व साल में चार बार आता है: चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ के महीने में। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि ये दोनों नवरात्रि व्रत रखने का विशेष अवसर प्रदान करती हैं। नवरात्र का उपवास करने और माता दुर्गा की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और माता की सदैव कृपा आपके ऊपर बरसती है। हर साल देश में दो में बार नवरात्रि मनाई जाती है। एक जो साल के शुरुआती दिनों मार्च के महीने में मनाई जाती है जिन्हे हम चैत्र नवरात्री के नाम से जाना जाता है। और दूसरा नवरात्री अक्टूबर के महीने में मनाई जाती है जिसे हम शारदीय नवरात्रि के नाम से जानी जाती है। इन दोनों नवरात्री के अपने- अपने महत्व है जाने कैसे?
चैत्र नवरात्रि,
चैत्र नवरात्रि आम तोर पर मार्च या अप्रैल के महीने में मनाई जाती है। यह नवरात्रि हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाई जाती है और इसके पहले दिन को गुढ़ी पड़वा या चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाते हैं। इस दौरान भक्त माता दुर्गा के नव स्वरूपों की पूजा करते हैं और विशेष व्रत रखते हैं। यह समय नये सिरे से जीवन की शुरुआत का प्रतीक है, और इसमें भक्त विशेष रूप से फल-फूल और पत्तियों का सेवन करते हैं।
शारदीय नवरात्रि
शारदीय नवरात्रि भी आम तोर पर सितंबर या अक्टूबर के महीने में मनाई जाती है। यह नवरात्रि दशेहरा से पहले होती है और 'दुर्गा पूजा' के नाम से मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व इस बात में है कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो दशहरा के दिन मनाया जाता है। इस दौरान भक्त 9 दिनों तक उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और माता की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
















































































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