शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजन का है बड़ा विशेष महत्व, जाने इसके शुभ मुहूर्त।
शरद पूर्णिमा को कोजागरी और कौमुदी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन विशेष रूप से चंद्रमा की पूजा के लिए जाना जाता है, साथ ही इस दिन राधा-कृष्ण, सरस्वती माता, शिव-पार्वती और विष्णु-लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ रासलीला की थी, जो इस दिन को और भी खास बनाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। भक्तजन इस दिन लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए घरों में दीप जलाते हैं और मिठाइयाँ बनाते हैं। शरद पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने की भी परंपरा है, जिससे आत्मा की शुद्धि होती है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के साथ ही लक्ष्मी पूजन को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं। इसलिए भक्त विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि, इस दिन पर ही माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। इसलिए लक्ष्मी पूजन का शरद पूर्णिमा पर बड़ा महत्व है।
शरद पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, स्नान और दान करने का सर्वोत्तम समय प्रातः 5:00 से 7:00 बजे के बीच है, जब चंद्रमा की किरणें अमृत समान मानी जाती हैं। इस दिन विशेष रूप से खीर बनाकर चंद्रमा को अर्पित करने का महत्व है। लोग इस खीर का प्रसाद भी बांटते हैं, जिससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
साल 2024 में शरद पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर की रात्रि में 8 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाएगी। वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट पर होगा। वैसे तो हिंदू धर्म में उदया तिथि की बड़ी मान्यता है, लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र पूजन किया जाता है और 16 अक्टूबर की रात्रि में ही पूर्णिमा तिथि रात्रि की होगी, इसलिए शरद पूर्णिमा की पूजा 16 की रात्रि में करना ही शुभ माना जाएगा।
















































































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