छठ पूजा: उगते और ढलते सूर्य की पूजा का अद्भुत महत्व। 

छठ पूजा एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा के लिए समर्पित है। यह त्यौहार खासतौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का एक अनोखा पहलू यह है कि इसमें न केवल उगते सूर्य की पूजा की जाती है, बल्कि ढलते सूर्य की भी उपासना की जाती है। इस साल 7 नवंबर 2024 को छठ पूजा का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। व्रति महिलाएं जल में खड़े होकर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं, और अपने परिवार की समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। यह व्रत कठिन है, क्योंकि इसमें 36 घंटे का निर्जल उपवास रखना होता है, और कई कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव अस्त होते हैं, तो वे अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं। इस समय सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का उद्देश्य यह भी है कि यह हमें यह सिखाता है कि जीवन में हमेशा एक अंधेरा (रात) के बाद उजाला (सुबह) जरूर आता है। यह हमें कभी हार न मानने और हमेशा आशा बनाए रखने का संदेश देता है। सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को सफल जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा प्रकृति और सूर्य देव को समर्पित पर्व है। इस दिन पूजा सामग्री में फल, सब्जियां और अन्य प्राकृतिक चीजें होती हैं। छठ पूजा में सूर्य देव के साथ छठी मैया की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से सुख, समृद्धि, और निरोगी शरीर की प्राप्ति होती है। वहीं, छठी मैया की पूजा से संतान दीर्घायु होती है और उनके जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार, छठ पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को भी पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

 

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