तुलसी विवाह कब है? जाने इसके शुभ मुहर्त और महत्व।
तुलसी विवाह हर साल कार्तिक माह की शुकल पक्ष की द्वादशी तिथि को करवाया जाया हैं। तुलसी विवाह हिन्दुओं का एक मह्त्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार दिवाली का बाद शीतल सप्तमी के दिन मनाया जाता है। यह दिन तुलसी माता और भगवान श्री कृष्ण के विवाह का प्रतीक है। इसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, जहां तुलसी के पौधे को विवाह की पवित्रता से जोड़कर उसकी पूजा की जाती है। तुलसी विवाह का उद्देश्य तुलसी के पौधे को पवित्र मानकर उसका सम्मान करना और घर में सुख-समृद्धि की कामना करना है।
तुलसी विवाह के शुभ मुहर्त,
इस साल कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 12 नवंबर को शाम 4:04 बजे से लेकर 13 नवंबर को दोपहर 1:01 बजे तक है। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 12 नवंबर को है। 12 नवंबर को देव उठनी एकादशी का व्रत होगा और शाम के समय में तुलसी विवाह का आयोजन किया जाएगा। तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त शाम 5:29 बजे से है क्योंकि इस समय सूर्यास्त होगा। उसके बाद से तुलसी विवाह की तैयारी शुरू होगी। अंधेरा होने पर देवी तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से किया जाएगा। तुलसी विवाह का शुभ समय शाम 5 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक है।
तुलसी विवाह का महत्व
1 तुलसी विवाह से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है।
2 इस दिन पूजा और व्रत करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।
3 तुलसी विवाह से शादीशुदा ज़िंदगी में खुशहाली बनी रहती है।
4 इस दिन वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
5 तुलसी विवाह से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।
















































































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