15 दिसंबर से शुरू होगा खरमास, एक महीने तक नहीं होंगे शादी-विवाह और मांगलिक कार्य।

नवंबर और दिसंबर का महीना शादियों और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि इस समय को हिंदू कैलेंडर में शादियों और शुभ कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। लेकिन 15 दिसंबर से एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवध‍ि आ रही है, जिसे "खरमास" कहा जाता है। खरमास के दौरान हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसे खासकर विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। खरमास का समय सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ जुड़ा हुआ होता है, और इसे एक "सांसारिक" समय माना जाता है, जब पुण्य और शुभ कार्यों के लिए माहौल उपयुक्त नहीं रहता। इसके बाद, एक महीने तक कोई भी नया कार्य शुरू नहीं किया जाता है, क्योंकि इसे धार्मिक दृष्टि से अपवित्र और अशुभ माना जाता है।खरमास के दौरान लोग विशेष रूप से ध्यान रखते हैं कि वे कोई भी ऐसा काम न करें जो आगे के जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति में रुकावट डाल सके। इसके कारण ही, विवाह जैसे कार्यों को 15 दिसंबर के बाद स्थगित कर दिया जाता है। इसके बाद, 15 जनवरी तक खरमास समाप्त होने के बाद पुनः शादियों और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।यह भी कहा जाता है कि खरमास के दौरान भगवान सूर्य की आराधना का विशेष महत्व है, ताकि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।

खरमास के दौरान करें ये काम, 

* खरमास में भगवान सूर्य देव और विष्णु जी की पूजा करें
* खरमास के दौरान नियमित रूप से तुलसी माता को जल अर्पित करें
* खरमास में शाम के समय घर के मंदिर में रोजाना दीया जलाना बिल्कुल भी न भूलें
* खरमास के दौरान पूजा पाठ, व्रत, भजन-कीर्तन और मंत्रों का जाप करें
* खरमास में अपनी क्षमतानुसार गरीब और जरूरतमंदों को अन्न का दान करें।

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