आज है मातंगी जयंती: जानिए वो गुप्त मंत्र जो बदल सकता है आपकी किस्मत।
आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर देवी मातंगी की जयंती मनाई जाती है। देवी मातंगी दस महाविद्याओं में से एक हैं और इन्हें वाणी, संगीत, कला और आकर्षण की देवी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इनकी उपासना से व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। खासकर अगर आप संगीत, बोलने की कला या किसी भी रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं, तो देवी मातंगी की कृपा से आपको सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। मंत्र महार्णव ग्रंथ में देवी मातंगी का एक खास 32 अक्षरों वाला मंत्र बताया गया है, जिसकी साधना करने से साधक को अद्भुत शक्तियां और वशीकरण की सिद्धि प्राप्त हो सकती है। लेकिन ध्यान रहे, इस मंत्र का जप पूरी श्रद्धा और सही विधि से करना जरूरी होता है, तभी इसका पूर्ण फल मिलता है।
देवी मातंगी का मंत्र
ऊँ ह्री ऐं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्ट चाण्डालि श्री मातङ्गेश्वरि सर्वजन वशंकरि स्वाहा।
मंत्र जप की विधि
इस मंत्र का पुरश्चरण वैसे तो दस हजार जप है, लेकिन जो लोग इतना जप ना कर पाये, वो केवल एक हजार मंत्रों का जप करके भी लाभ उठा सकते हैं। इसके लिये सबसे पहले आपको देवी मातंगी की मानसिक रूप से धूप-दीप, पुष्प आदि से विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए, यानि मन ही मन देवी मां का ध्यान करते हुए ठीक इस प्रकार पूजा करनी चाहिए जैसे कि आप साक्षात देवी मां की मूर्ति की ही पूजा कर रहे हों। इस प्रकार पूजा के बाद आपको आसन पर बैठकर देवी मातंगी के मंत्र का कम से कम एक हजार बार जप करना चाहिए, लेकिन अगर स्वास्थ्य कारणों से आपके लिये इतने मंत्र का जप करना भी मुश्किल हो, तो आप केवल 108 मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। इस प्रकार जप के बाद मधु, यानि शहद से युक्त महुए के फूलों से आपको हवन करना चाहिए। फिर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। इस प्रकार आपका मंत्र सिद्ध हो जायेगा। अब आप उसका प्रयोग भी कर सकते हैं। इस मंत्र को सिद्ध करने से देवी मातंगी आपकी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।
















































































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