काल भैरव के पूजन से प्राप्त करें आशीर्वाद: जानें कैसे इस दिन के व्रत से आपको शांति और सुख मिलेगा।
कालाष्टमी, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, विशेष रूप से भगवान शिव के भैरव स्वरूप की पूजा का दिन है। इस दिन विशेष रूप से काल भैरव की उपासना की जाती है, जिन्हें मृत्यु और समय के नियंता के रूप में पूजा जाता है। काल भैरव का पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी संकटों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है।
काल भैरव के तीन प्रमुख रूप हैं:
1 काल भैरव - जो समय और मृत्यु के देवता माने जाते हैं।
2 बटुक भैरव - जो खासकर बच्चों और युवा पीढ़ी के लिए कल्याणकारी होते हैं।
3 स्वर्णाकर्षण भैरव - जो धन और समृद्धि के देवता माने जाते हैं।
कालाष्टमी व्रत का महत्व:
कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो जीवन में किसी तरह की कठिनाई या मुसीबत का सामना कर रहे होते हैं। इस दिन काल भैरव की पूजा से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है, और अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है। यह व्रत आत्मिक शांति, स्वास्थ्य, और समृद्धि के लिए किया जाता है।
कालाष्टमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप
ॐ कालभैरवाय नम:
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि
ॐ तीखदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्। भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि।
















































































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