UN में भारतीय बहादुरी की मिसाल, शहीद सैनिकों को मिला सबसे बड़ा शांति सम्मान।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय शांति सैनिकों की भूमिका लंबे समय से सराहनीय रही है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने हमेशा वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अपने सैन्य और पुलिस बलों को संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में भेजा है। हाल ही में दो भारतीय शांति सैनिकों — ब्रिगेडियर जनरल अमिताभ झा और हवलदार संजय सिंह — को मरणोपरांत "डैग हैमरस्कॉल्ड" पदक से सम्मानित करने की घोषणा ने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। ब्रिगेडियर झा यूएनडीओएफ (यूएन डिसएंगेजमेंट ऑब्जर्वर फोर्स) में सेवाएं दे रहे थे, जबकि हवलदार संजय सिंह कांगो में संयुक्त राष्ट्र के स्थिरीकरण मिशन MONUSCO में तैनात थे। इन दोनों सैनिकों ने सेवा के दौरान अपने प्राण त्याग दिए, लेकिन उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिल रही है। यह पुरस्कार उन सैनिकों को दिया जाता है जो संयुक्त राष्ट्र के अधीन काम करते हुए वीरगति को प्राप्त होते हैं, और यह भारत के बढ़ते वैश्विक योगदान का भी प्रतीक है।
भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में चौथा सबसे बड़ा योगदानकर्ता देश है, और इसके 5,300 से अधिक सैन्य व पुलिसकर्मी विभिन्न देशों में तैनात हैं, जिनमें मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो, लेबनान, सोमालिया, दक्षिण सूडान और पश्चिमी सहारा शामिल हैं। यह सम्मान सिर्फ दो सैनिकों के साहस की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन हज़ारों भारतीयों की भावना का प्रतीक है जो अपने देश से हज़ारों किलोमीटर दूर, शांति और स्थिरता के लिए जीवन का बलिदान देने को तैयार रहते हैं। 29 मई को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस स्वयं पुष्पांजलि अर्पित कर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे और 57 शांति सैनिकों को यह पदक प्रदान करेंगे। भारत के ये वीर सपूत अब न केवल अपने देश के नायक हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और सेवा का आदर्श बन चुके हैं।
















































































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