31 मई को है शीतला षष्ठी पर्व, जानें इसका धार्मिक महत्व और व्रत की परंपरा।
हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को शीतला षष्ठी या सीतल षष्ठी का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की याद में मनाया जाता है। इसे बहुत पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। यह पर्व खासतौर पर ओडिशा के संबलपुर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लोग इसे एक उत्सव और त्योहार की तरह मनाते हैं। शीतला षष्ठी को लोग ‘मानसून वेडिंग’ भी कहते हैं, क्योंकि यह त्योहार आमतौर पर मानसून आने से पहले आता है। इस समय मौसम भी बदलता है और लोगों में खुशियों का माहौल होता है। इस साल शीतला षष्ठी 31 मई 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और सुख-शांति और अच्छे जीवन की कामना करते हैं। खासकर विवाहित महिलाएं और जो शादी की इच्छा रखती हैं, वे इस दिन व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं।
पौराणिक महत्व: क्यों मनाया जाता है ये पर्व?
पुराणों के अनुसार, माता पार्वती, जो देवी सती का ही दूसरा रूप थीं, ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी के दिन उनसे विवाह किया। इस शुभ विवाह की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा, इसी दिन भगवान कार्तिकेय का जन्म भी हुआ था, जिन्होंने दैत्य तारकासुर का वध करके लोकों में शांति स्थापित की थी।
शीतला षष्ठी 2025: शुभ तिथि और मुहूर्त
* षष्ठी तिथि प्रारंभ: 31 मई, रात 8:15 बजे
* षष्ठी तिथि समाप्त: 1 जून, रात 8:00 बजे
* अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:47 बजे तक
* अमृत काल: दोपहर 2:49 से शाम 4:23 बजे तक
* रवि योग: 31 मई, रात 9:07 से 1 जून, सुबह 5:24 तक।
















































































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