‘बम बम भोले’ के जयकारों के साथ शुरू हुई अमरनाथ यात्रा, आतंक के साए में भी श्रद्धालुओं का जोश बरकरार।
अमरनाथ यात्रा का दूसरा जत्था गुरुवार, 3 जुलाई को श्रीनगर के बालटाल और पहलगाम मार्ग के लिए रवाना हुआ। यात्रा की औपचारिक शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। बालटाल मार्ग से रवाना हुए श्रद्धालु आज ही पवित्र गुफा में भगवान शिव के दर्शन कर सकेंगे। वहीं, जम्मू से भी सुबह करीब 4 बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यात्रियों का दूसरा जत्था श्रीनगर के लिए भेजा गया। देशभर से आए श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के पवित्र शिवलिंग के दर्शन को लेकर बेहद उत्साहित नजर आए।
3 जुलाई 2025 से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में भले ही पहलगाम आतंकी हमले की छाया रही हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह कम नहीं हुआ है। जम्मू से श्रीनगर की ओर रवाना हुए श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास है। उनका मानना है कि अगर भगवान ने उन्हें बुलाया है, तो उनकी रक्षा भी वही करेंगे। श्रद्धालु यह भी कह रहे हैं कि वह आतंकवाद को जवाब देने के उद्देश्य से भी यह यात्रा कर रहे हैं। ‘बम बम भोले’ के जयकारों के साथ यात्रा कर रहे लोग मानते हैं कि आस्था इस बार आतंक पर भारी पड़ रही है। साथ ही उन्होंने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों पर भी पूरा भरोसा जताया, जो उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। इस वर्ष यह 38 दिवसीय यात्रा 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वह स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता का रहस्य सुनाया था। इसलिए इसे ‘अमरनाथ’ कहा जाता है। पुराणों में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है — बाबा अमरनाथ के दर्शन से काशी से 10 गुना, प्रयाग से 100 गुना, और नैमिषारण्य से 1000 गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा को पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं।
















































































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