कजरी तीज पर नीमड़ी माता की पूजा का महत्व और करने का सही तरीका। 

भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और कजरी तीज के पारंपरिक गीत गाकर माहौल को और भी खूबसूरत बना देती हैं। पंचांग के अनुसार इस वर्ष कजरी तीज 12 अगस्त को है, जिसे बड़ी तीज और सत्तू तीज के नाम से भी जाना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पूरे मन से व्रत रखती हैं और पति की लंबी उम्र, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करती हैं। इसके साथ ही, व्रत के दौरान कुछ विशेष उपाय और पूजा विधि अपनाने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। इस व्रत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके साथ नीमड़ी माता की पूजा भी की जाती है, जिसे देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। नीमड़ी पूजा से परिवार में बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिलती है और सौभाग्य की वृद्धि होती है। कजरी तीज पर महिलाएं सत्तू से बना खास प्रसाद तैयार करती हैं, जो व्रत खोलने के बाद ग्रहण किया जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, जिसे चंद्रमा दर्शन के बाद ही खोला जाता है। इस तीज का उत्सव महिलाओं के बीच मिलन और प्रेम का भी प्रतीक माना जाता है, जहां वे झूला झूलकर खुशी मनाती हैं। इस प्रकार, कजरी तीज न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक सौहार्द को भी मजबूत करती है। हर महिला को इस तीज पर अपनी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए व्रत जरूर करना चाहिए ताकि उनका परिवार खुशहाल और संपन्न बना रहे।

कजरी तीज के दिन किए जाने वाले उपाय, 
1. सुबह स्नान अवश्य करें: कजरी तीज के दिन प्रातः स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
2. सोलह श्रृंगार करें:  पूजा के दौरान सोलह श्रृंगार (सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियाँ आदि) कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
3.  नीमड़ी माता की पूजा: नीम की डाली को देवी का रूप मानकर विधिपूर्वक पूजा करें। इससे घर में सौभाग्य और सुरक्षा मिलती है।
4.  निर्जला व्रत रखें: सूर्योदय से लेकर चंद्रमा दर्शन तक बिना जल पीए व्रत रखें। यदि स्वास्थ्य की समस्या हो तो फलाहार कर सकते हैं।
5.  कजरी तीज के गीत गाएं:  व्रत के दौरान कजरी तीज के पारंपरिक गीत गाकर पूजा की भव्यता बढ़ाएं।
6.  सत्तू का प्रसाद बनाएं: व्रत खोलने के लिए जौ, गेहूं, चना और घी से बना सत्तू तैयार करें।
7. चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात में चंद्रमा दर्शन के बाद चंद्रमा को जल अर्पित करें और व्रत खोलें।
8. पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें:  भगवान शिव और माता पार्वती से पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना करें।
9. साफ-सुथरा और पवित्र स्थान तैयार करें: पूजा स्थान को साफ और स्वच्छ रखें, जहां सभी पूजा सामग्रियां व्यवस्थित हों।
10. शांत मन से व्रत करें: व्रत और पूजा के दौरान ध्यान केंद्रित रखें और मन को शुद्ध रखें।

 

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