गणेश चतुर्थी पर कैसे करें भगवान गणेश की स्थापना? जानें संपूर्ण गाइड।
हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इन 10 दिनों के दौरान भक्तजन भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष 2025 में गणेश चतुर्थी का शुभारंभ बुधवार, 27 अगस्त से हो रहा है। इस दिन मंदिरों, घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। 10 दिनों तक गणेश उत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा और फिर अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त भावभीनी विदाई देंगे। इस पर्व का पहला दिन सबसे विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी दिन बप्पा का आगमन होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इस दिन कौन से कार्य शुभ होते हैं और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, ताकि गणेश जी की कृपा बनी रहे।
गणेश चतुर्थी के पहले दिन करें ये शुभ कार्य:
1. स्नान करके साफ वस्त्र पहनें – शुद्धता और पवित्रता के साथ पूजा की शुरुआत करें।
2. पूजा स्थान की सफाई करें – जहां गणेश जी की स्थापना करनी हो, वहां गंगाजल या पवित्र जल का छिड़काव करें।
3. गणेश जी की प्रतिमा लाएं – घर में मिट्टी या पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा का चयन करें।
4. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं – मूर्ति स्थापना से पहले लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले कपड़े को बिछाएं।
5. स्थापना मुहूर्त में करें – गणपति की प्रतिमा शुभ मुहूर्त में ही स्थापित करें (इस वर्ष: 27 अगस्त 2025, बुधवार)।
6. कलश स्थापना करें – गणेश जी के पास एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर, आम के पत्ते और नारियल रखें।
7. श्री गणेश मंत्रों का जाप करें – "वक्रतुण्ड महाकाय..." जैसे मंत्रों का उच्चारण करें।
8. 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाएं – ये गणेश जी को प्रिय माने जाते हैं।
9. आरती करें और प्रसाद बांटें – घर में पूजा के बाद आरती करें और सबको प्रसाद दें।
10. भक्ति और श्रद्धा से पूजा करें – मन, वचन और कर्म से भगवान गणेश की भक्ति करें।
गणेश चतुर्थी के पहले दिन ये काम न करें:
1. कटे-फटे या गंदे कपड़े न पहनें – पूजा के समय साफ और संपूर्ण वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
2. गणेश प्रतिमा को जमीन पर न रखें – मूर्ति को हमेशा चौकी या ऊँचे स्थान पर स्थापित करें।
3. मूर्ति स्थापना से पहले पूजा न करें – जब तक गणेश जी की मूर्ति विधिपूर्वक स्थापित न हो जाए, तब तक पूजा शुरू न करें।
4. बिना स्नान के पूजा न करें – शारीरिक शुद्धता के बिना पूजा करना अशुभ माना जाता है।
5. मूर्ति को बार-बार न छुएं – विशेषकर स्थापना के बाद प्रतिमा को बार-बार छूना वर्जित होता है।
6. प्याज-लहसुन या मांसाहारी भोजन का सेवन न करें – इस दिन सात्विक भोजन ही करें।
7. क्रोध, झगड़ा या अपशब्दों से बचें – यह दिन शांति और भक्ति से भरा होना चाहिए।
8. धातु की मूर्तियां न चुनें (यदि विसर्जन करना हो) – मिट्टी की मूर्तियां ही लें, ताकि आसानी से विसर्जन हो सके और पर्यावरण को नुकसान न हो।
9. पूजा के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल न करें – पूजा में एकाग्रता और मन की शुद्धता जरूरी होती है।
10. गणेश जी की मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर न रखें – यह दिशा स्थापना के लिए अशुभ मानी जाती है।















































































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