टोक्यो में प्रधानमंत्री मोदी का राजस्थानी पोशाक पहने जापानी महिलाओं ने किया भव्य तरीके से स्वागत, जल्द ही वे चीन के SCO सम्मेलन के लिए होंगे रवाना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जापान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर टोक्यो पहुंचे। उनका वहां शानदार और भव्य स्वागत किया गया, जिसमें भारतीय समुदाय के लोग भी बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए। स्वागत समारोह में भारतीय परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिली। खास तौर पर, राजस्थानी पोशाक पहने जापानी महिलाओं ने राजस्थानी लोकगीत गाकर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक और सांस्कृतिक अंदाज में स्वागत किया, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद की भावना झलकती है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के जापान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जापान के टोक्यो पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में भारतीय समुदाय के लोग भी बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए। खास बात यह रही कि राजस्थानी पोशाक पहने जापानी महिलाओं ने राजस्थानी लोकगीत गाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया, जिससे भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव दिखा। इस बीच, मोदी जी का स्वागत करने वाली एक जापानी महिला, जो खुद को ‘राजस्थानी मधु’ कहती हैं, ने बताया कि उन्होंने हिंदी में मोदी जी का स्वागत किया। जब प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे पूछा कि क्या वह गा सकती हैं, तो उन्होंने हां कहा और उनके लिए एक भजन भी गाया। इस तरह से यह स्वागत समारोह और भी खास और यादगार बन गया। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करके बताया कि प्रधानमंत्री मोदी टोक्यो पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा शाम को दो देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रस्थान वक्तव्य में कहा कि उनकी जापान यात्रा दोनों देशों के बीच सभ्यता और संस्कृति के रिश्तों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस यात्रा में वे 29 और 30 अगस्त को शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देश कई मुद्दों पर बात करेंगे। जापान की यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी चीन भी जाएंगे। 31 अगस्त से 1 सितंबर तक वे चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी सात साल बाद चीन की पहली यात्रा होगी, खासतौर से 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद। यह दौरा दोनों देशों के बीच संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
















































































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