"हमने भारत को खो दिया है" – ट्रंप के बयान से भड़की नई कूटनीतिक हलचल, रूस-चीन के करीब जाने का आरोप!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर ऐसा बयान दे डाला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के गलियारों में एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है, “मुझे लगता है कि हमने भारत को गंवा दिया है... रूस और चीन के हाथों!”
ट्रंप के इस बयान ने न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि ट्रंप प्रशासन भारत की मौजूदा विदेश नीति को लेकर असहज है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन-रूस युद्ध, वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
भारत पर टैरिफ का मामला भी उछला
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में भारत पर 50% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया गया था। इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 251 पन्नों की रिपोर्ट भी दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि यह टैरिफ यूक्रेन युद्ध और उससे उपजे “राष्ट्रीय आपातकाल” से निपटने के लिए लगाया गया था।
भारत की प्रतिक्रिया?
इस संवेदनशील बयान पर जब विदेश मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “इस विषय पर फिलहाल हमारे पास कहने को कुछ नहीं है।”
हालांकि, यह प्रतिक्रिया कई सवालों को खुला छोड़ गई है — क्या भारत वाकई अमेरिका से दूरी बना रहा है? या यह सिर्फ ट्रंप की चुनावी राजनीति का हिस्सा है?
जॉन बोल्टन का भी बड़ा दावा
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी दावा किया था कि “ट्रंप के मोदी से अच्छे व्यक्तिगत संबंध थे, लेकिन अब वो खत्म हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को व्यक्तिगत समीकरणों की नजर से देखते हैं, और यही उनके कूटनीतिक फैसलों में दिखाई देता है। व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया है।”
चीन और रूस की बढ़ती मौजूदगी
बोल्टन के मुताबिक, चीन खुद को अमेरिका के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, और भारत जैसे देशों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहा है। ऐसे में ट्रंप का बयान सिर्फ एक चिंता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों की चेतावनी भी माना जा रहा है।
















































































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