पुतिन की चेतावनी: यूक्रेन को अमेरिकी मिसाइलें रिश्तों को पहुंचाएंगी गहरी चोट, भारत की प्रशंसा!
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें, विशेषकर टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें, उपलब्ध कराना रूस और अमेरिका के संबंधों को एक "नए और खतरनाक टकराव" की ओर ले जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से युद्धक्षेत्र की स्थिति में कोई निर्णायक बदलाव नहीं आएगा।
पुतिन सोची स्थित काला सागर रिसॉर्ट में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति मंच को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूसी सेना यूक्रेन में लगातार और धीरे-धीरे बढ़त बना रही है। यदि अमेरिका यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देता है, तो वह रूसी हवाई सुरक्षा प्रणालियों के लिए नया खतरा जरूर बनेगा, लेकिन रूस जल्द ही इसका मुकाबला करना सीख जाएगा। उन्होंने कहा, "यह निश्चित रूप से युद्ध में शक्ति संतुलन नहीं बदलेगा।"
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस को ‘कागजी शेर’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने कहा कि रूस केवल यूक्रेन से नहीं, बल्कि पूरे नाटो गठबंधन से जंग लड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप के साथ अलास्का में हुई शिखर बैठक में यूक्रेन संकट का समाधान खोजने की ईमानदार कोशिश हुई थी।
पुतिन ने ट्रंप की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि रूस और अन्य देशों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ वैश्विक बाजार पर बुरा असर डालेंगे। उन्होंने आगाह किया कि इससे अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे अमेरिकी आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
भारत और चीन को लेकर पुतिन ने अमेरिका के रवैये की भी आलोचना की और भारत की कूटनीतिक दृढ़ता की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारत के खिलाफ अमेरिकी टैरिफ विफल होंगे। भारत एक ऐसा देश है जो खुद का सम्मान करता है और खुद को कभी अपमानित नहीं होने देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जो भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाए।"
पुतिन ने जोर देकर कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक विकास बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस अब उन देशों के साथ मजबूत संबंध बनाना चाहता है, जो स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हैं और किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकते – भारत और चीन इनमें प्रमुख उदाहरण हैं।
रूसी राष्ट्रपति की इन टिप्पणियों से साफ है कि यूक्रेन संकट अब एक बड़े वैश्विक शक्ति संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसमें अमेरिका, रूस, नाटो, और एशियाई ताकतों की भूमिका निर्णायक होती जा रही है।
















































































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