भारत-रूस की दोस्ती पर नहीं पड़ा ट्रंप टैरिफ का असर, पुतिन ने दिया भारत को समर्थन का भरोसा!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का मकसद था भारत को रूस से दूरी बनाने पर मजबूर करना। अमेरिकी सोच यह थी कि टैरिफ के दबाव में भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और अंततः रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो जाएगा।

लेकिन ट्रंप की यह रणनीति उल्टा असर दिखा रही है। भारत और रूस की दोस्ती पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। इतना ही नहीं, अब रूस खुद भारत को अमेरिकी टैरिफ के नुकसान से बचाने के लिए कदम उठा रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अपनी सरकार को स्पष्ट आदेश दिया कि भारत के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने के उपाय किए जाएं। पुतिन का यह बयान दक्षिण रूस के काला सागर स्थित सोची शहर में आयोजित ‘वल्दाई चर्चा मंच’ में आया, जिसमें भारत सहित 140 देशों के सुरक्षा और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ शामिल थे।

पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच कभी कोई अंतर्राज्यीय तनाव या समस्या नहीं रही है। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताया और उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि मोदी एक संतुलित, बुद्धिमान और राष्ट्रहितैषी नेता हैं, जिनके साथ संबंध सहज और भरोसेमंद हैं।

पुतिन ने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा, जिससे भारत की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति की मिसाल कायम हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत को जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई रूस द्वारा अधिक कच्चा तेल निर्यात करके और भारत से अन्य उत्पाद आयात करके की जाएगी।

पुतिन ने सुझाव दिया कि भारत से कृषि उत्पादों, औषधियों और दवाओं का आयात बढ़ाया जा सकता है, जिससे व्यापार असंतुलन को संतुलित किया जा सके। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से साकार करने के लिए वित्तपोषण, रसद और भुगतान जैसी बाधाओं को दूर करना होगा।

इस तरह साफ है कि भारत और रूस के संबंध न केवल ऐतिहासिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद और अधिक सुदृढ़ हो रहे हैं। अमेरिका द्वारा लगाया गया टैरिफ अब उस रणनीति का हिस्सा नहीं रहा, जो कभी भारत को रूस से अलग करने की कोशिश थी – बल्कि अब यह भारत-रूस मित्रता को और प्रगाढ़ करने का माध्यम बन गया है।
 

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