भारत दौरे पर अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी, तालिबान-भारत रिश्तों में नई हलचल!

तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत की सात दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद भारत और तालिबान शासन के बीच अब तक का सबसे बड़ा और उच्च स्तरीय संपर्क है।

मुत्ताकी इस दौरान न केवल भारतीय अधिकारियों से बातचीत करेंगे, बल्कि दारुल उलूम देवबंद जैसे प्रतिष्ठित मदरसे और विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का भी दौरा करेंगे। देवबंद में वर्तमान में कुछ अफगान छात्र पढ़ाई भी कर रहे हैं, जिससे मुत्ताकी की यह यात्रा धार्मिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर प्रतीकात्मक मानी जा रही है।

इस दौरे की शुरुआत पहले ही सितंबर में होनी थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण इसे टालना पड़ा। हाल ही में UNSC की समिति ने मुत्ताकी को 9 से 16 अक्टूबर तक भारत यात्रा की अस्थायी अनुमति दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि उनकी यात्रा सात दिन की होगी।

यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। हालांकि, भारत मानवीय सहायता, सुरक्षा मुद्दों और अफगान जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए सीमित संवाद बनाए रखे हुए है। मई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मुत्ताकी के बीच फोन पर बातचीत भी हुई थी, जो दोनों देशों के बीच संपर्क की शुरुआत मानी गई।

तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने के बाद अफगानिस्तान की राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल गई। अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के बाद, तालिबान ने दोबारा सत्ता संभाल ली, लेकिन अब तक उसे वैश्विक मान्यता नहीं मिली है। हालांकि, कुछ देश जैसे रूस ने हाल ही में उसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी है।

भारत ने तालिबान के सत्ता में आने से पहले अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश किया था, जिसमें सड़कें, स्कूल और अस्पतालों का निर्माण शामिल था। तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अपने नागरिकों और राजनयिकों को वापस बुला लिया था। बाद में, 2022 में भारत ने काबुल में एक 'तकनीकी मिशन' फिर से शुरू किया, जो मानवीय सहायता के वितरण और न्यूनतम राजनयिक उपस्थिति बनाए रखने का काम कर रहा है।

मुत्ताकी की यह यात्रा संकेत देती है कि भारत अब तालिबान शासन के साथ नई संभावनाओं और समीकरणों की तलाश कर सकता है — हालांकि, भारत की प्राथमिकताएं आतंकवाद, महिलाओं के अधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पहले की तरह बनी रहेंगी।

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