भारत में तालिबान के मंत्री को देख खौफ में पाकिस्तान: ख्वाजा आसिफ ने दी अफगानिस्तान को खुली चेतावनी!
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुतक्की की हालिया भारत यात्रा से पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मच गई है। इस यात्रा ने न सिर्फ पाकिस्तान की बेचैनी को उजागर किया है, बल्कि पड़ोसी देश के सियासी गलियारों में अफगानिस्तान को लेकर गुस्से की लहर भी पैदा कर दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में खुलकर तालिबान और भारत के बढ़ते रिश्तों पर नाराजगी जताई और अफगानिस्तान पर तीखा हमला बोला।
ख्वाजा आसिफ ने कहा, "अफगान हमेशा से भारत के वफादार रहे हैं—कल भी, आज भी और कल भी रहेंगे।" उनका यह बयान साफ तौर पर यह जाहिर करता है कि पाकिस्तान तालिबान के साथ भारत की बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियों को पचा नहीं पा रहा है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान के खिलाफ खड़ा रहा है और आगे भी रहेगा।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। खासकर जब सीमा पार से आतंकी गतिविधियों में इजाफा हुआ है और पाकिस्तान बार-बार अफगान सरकार से इन पर लगाम लगाने की मांग करता रहा है। ख्वाजा आसिफ पहले भी संसद में अफगानिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं कि "अब और बर्दाश्त नहीं होगा।"
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि लगभग तीन साल पहले वे खुद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काबुल यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने अफगान नेताओं को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अफगान धरती पर रह रहे 6 से 7 हजार आतंकियों के ठिकानों को बंद किया जाए, क्योंकि ये पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। लेकिन, आसिफ के मुताबिक अफगान प्रशासन ने कोई ठोस भरोसा नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि काबुल की ओर से उल्टा ये कहा गया कि इन आतंकियों को वहीं रोकने के लिए वित्तीय मदद दी जाए।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से यह गारंटी भी मांगी थी कि ये आतंकी किसी भी हालत में पाकिस्तान वापस न लौटें। लेकिन, अफगान सरकार ने ऐसी कोई गारंटी देने से साफ इनकार कर दिया।
मुतक्की की भारत यात्रा ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की कूटनीति में उबाल ला दिया है। भारत और तालिबान के बीच बढ़ती बातचीत से जहां पाकिस्तान खुद को किनारे महसूस कर रहा है, वहीं अब वह तालिबान को भी कटघरे में खड़ा करने से पीछे नहीं हट रहा। आने वाले समय में यह तिकड़ी—भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान—दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक संतुलन को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखने लायक होगा।
















































































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