AMRAAM मिसाइलों को लेकर अफवाहों पर अमेरिकी युद्ध विभाग की सफाई: पाकिस्तान को नहीं मिल रही नई मिसाइलें!
हाल ही में अमेरिकी युद्ध विभाग द्वारा जारी एक स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट संशोधन को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में कई भ्रामक खबरें सामने आईं, जिनमें दावा किया गया कि पाकिस्तान को नई AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missiles) मिलने वाली हैं। इन रिपोर्टों ने खास तौर पर भारत में सुरक्षा और सामरिक चिंता को जन्म दिया, लेकिन अब अमेरिका ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिकी स्पष्टीकरण: "नई मिसाइल नहीं, सिर्फ रखरखाव"
अमेरिकी युद्ध विभाग ने साफ किया है कि कॉन्ट्रैक्ट का मकसद केवल "सस्टेनमेंट और स्पेयर्स" यानी पुरानी मिसाइलों और संबंधित उपकरणों के रखरखाव और पुर्ज़ों की आपूर्ति से जुड़ा है। इसका पाकिस्तान को नई मिसाइलों की आपूर्ति या सैन्य क्षमता में किसी भी तरह के उन्नयन से कोई संबंध नहीं है।
FMS कॉन्ट्रैक्ट के तहत कई देशों को समर्थन
यह डील Foreign Military Sales (FMS) प्रोग्राम के तहत की गई है, जिसमें पाकिस्तान के अलावा कई अन्य देश शामिल हैं—जैसे ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, कतर, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, ताइवान, सऊदी अरब आदि। इन सभी देशों को उनके मौजूदा अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के मेंटेनेंस के लिए यह समर्थन दिया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में क्या था भ्रम?
पहले की कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलों की नई खेप सौंप सकता है, जिससे F-16 फाइटर जेट बेड़े को उन्नत बनाने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर कयास लगाए गए कि पाकिस्तान अपने एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत कर रहा है।
हालांकि, अमेरिकी युद्ध विभाग ने इन दावों को "बिलकुल गलत और आधारहीन" बताया। विभाग ने यह भी कहा कि इस तरह की अटकलें गलत जानकारी पर आधारित हैं और सामरिक मसलों पर गैर-जिम्मेदाराना बहस को जन्म देती हैं।
क्यों फैली अफवाह?
पाकिस्तान का F-16 बेड़ा लंबे समय से चर्चा में रहा है, खासकर भारत के परिप्रेक्ष्य में। जब भी अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के साथ कोई सैन्य अनुबंध सामने आता है, तो इसे तुरंत सैन्य उन्नयन के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि जैसे ही नया AMRAAM अनुबंध सामने आया, मीडिया में यह अनुमान लगाया जाने लगा कि यह डील पाकिस्तान को नई मिसाइलों की आपूर्ति से जुड़ी है।
निष्कर्ष:
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पाकिस्तान को नई AMRAAM मिसाइलें नहीं मिल रही हैं।
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जो सप्लाई की जा रही है, वह पुरानी मिसाइलों और सिस्टम के रखरखाव और पुर्ज़ों से जुड़ी है।
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यह एक रूटीन FMS प्रक्रिया है, जिसमें कई देशों को शामिल किया गया है।
अमेरिकी युद्ध विभाग ने साफ किया है कि ऐसी संवेदनशील खबरों पर केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी ली जानी चाहिए, ताकि अफवाहों और गलतफहमियों से बचा जा सके।
















































































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