तालिबान VS पाकिस्तान: पैंट पर टंगी 'जीत', डूरंड रेखा बनी रणभूमि, 200 से ज्यादा की मौत। भागी पाकिस्तान आर्मी।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और हालात युद्ध जैसे बनते जा रहे हैं। डूरंड रेखा, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा मानी जाती है, अब एक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी है। बीते कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच खूनी संघर्ष ने एक अजीबो-गरीब मोड़ ले लिया, जब तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट उतारकर हथियारों पर टांग दी और खुलेआम जश्न मनाया।
हथियारों के साथ पैंट टांगकर 'विजय उत्सव'
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और कंधार पर हवाई हमले किए, जिसमें 15 अफगान नागरिक मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए। यह हमला उस समय हुआ जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत दौरे पर थे। इसके जवाब में तालिबान ने स्पिन-बोल्डक इलाके में पाकिस्तानी चौकियों पर धावा बोल दिया। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी सैनिक डूरंड रेखा के पास से अपनी चौकियां छोड़कर भाग खड़े हुए।
अफगान पत्रकार दाउद जुनबिश के अनुसार, तालिबान ने न केवल पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ा बल्कि उनके हथियार जब्त कर लिए। इसके बाद तालिबानी लड़ाके पाक सैनिकों की उतारी गई पैंट को बंदूक की नोक पर टांगकर चौराहे पर खड़े हो गए और अपनी "जीत" का एलान किया। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हो चुके हैं, जो इस संघर्ष के अलग ही रंग को सामने लाते हैं।
48 घंटे का सीजफायर, लेकिन तनाव बरकरार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, दोनों पक्षों ने 48 घंटे के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है, लेकिन हालात से साफ है कि यह शांति ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार गोलाबारी और मोर्चाबंदी जारी है। बीते चार दिनों में पाकिस्तान और तालिबान के बीच हुई झड़पों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
पाकिस्तान के लिए तालिबान बना सिरदर्द
कभी पाकिस्तान का 'रणनीतिक सहयोगी' रहा तालिबान, अब उसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर दोनों देशों के बीच पुराना विवाद एक बार फिर आग में घी डाल रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP को अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह मिली हुई है, जबकि तालिबान इसे नकारता रहा है।
अब जब लड़ाई पैंट तक आ गई है, तो यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं, बल्कि एक बदले की जंग बन चुकी है — जिसमें न तो कोई विजेता है, और न ही फिलहाल कोई अंत नजर आता है।
















































































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