“हम ब्रांड हैं, ट्रेंड नहीं” — तेजप्रताप यादव ने चुप्पी तोड़ी, बढ़ी बेचैनी!
जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच एक बड़ा राजनीतिक संकेत दे दिया है। उन्होंने इशारा किया है कि चुनाव नतीजों के बाद ही वे आगे की सियासी दिशा तय करेंगे। तेजप्रताप ने कहा, “हम कहां जाएंगे, इसका फैसला 14 तारीख को नतीजे आने के बाद करेंगे। हमारी किसी से दुश्मनी नहीं है। हम किसी को दुश्मन नहीं मानते, कोई हमें दुश्मन मान ले तो वह उनकी सोच है। हम जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं।”
तेजप्रताप यादव ने यह भी साफ किया कि वे चुनाव मैदान में किसी भी पार्टी या नेता से मुकाबला नहीं, बल्कि जनता के समर्थन के दम पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम फिलहाल महुआ जा रहे हैं, और छठ के बाद पूरे बिहार का दौरा करेंगे। महुआ में मेरा मुकाबला किसी से नहीं है — जनता हमारे साथ है। बिहार में हत्या, पलायन और बेरोजगारी जैसे मुद्दे ही इस बार असली चुनावी मुद्दे हैं।”
जब तेजप्रताप से पूछा गया कि महुआ सीट पर आरजेडी ने मुकेश रौशन को उम्मीदवार बनाया है, तो उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “वो कौन आदमी है? किसका नाम ले रहे हैं आप लोग? फालतू बातें मत कीजिए।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
तेजप्रताप ने खुद को “स्टार प्रचारक” बताते हुए कहा, “अखिलेश यादव आएं या कोई और, हम अपने आप में समर्थ हैं। हम खुद एक ब्रांड हैं।” इस बयान से यह संकेत मिलता है कि तेजप्रताप यादव अब अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में हैं और पारिवारिक राजनीति से थोड़ा अलग रास्ता चुन सकते हैं।
महागठबंधन द्वारा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने पर उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, “उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया गया है, उसमें हम क्या कर सकते हैं।” वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जंगलराज’ वाले बयान पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “मोदी जी जो जंगलराज-जंगलराज कहते हैं, अभी कौन-सा मंगलराज है? अभी तो महा-जंगलराज है।”
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं — पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर को होगी। इस बार मुकाबला एनडीए (भाजपा-जेडीयू गठबंधन) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस और वाम दलों) के बीच है। हालांकि, तेजप्रताप यादव के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि नतीजों के बाद बिहार की राजनीति में नई सियासी जोड़-तोड़ देखने को मिल सकती है।
















































































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