फडणवीस ने कहा — “दोस्त बैसाखी नहीं होते”, अमित शाह के बयान पर दी सफाई!

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि “दोस्त बैसाखी नहीं होते।”
वे यह टिप्पणी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के संदर्भ में कर रहे थे, जिसमें शाह ने कहा था कि

“महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी अब किसी बैसाखी पर नहीं, बल्कि अपने बलबूते पर खड़ी है।”

अमित शाह के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग मायनों में देखा गया — कुछ विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी के सहयोगी दलों (एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राकांपा) पर तंज के रूप में लिया।
हालाँकि, मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस पर स्पष्ट कहा कि

“जो लोग इस टिप्पणी पर सवाल उठा रहे हैं, वे ‘बैसाखी’ शब्द का अर्थ ही नहीं समझते। दोस्त बैसाखी नहीं होते, वे साथ चलने वाले साथी होते हैं।”


फडणवीस ने सहयोगियों के साथ रिश्तों पर जताया भरोसा

फडणवीस वर्तमान में महाराष्ट्र में तीन दलों के गठबंधन (भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट, और अजित पवार की एनसीपी) की सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह गठबंधन राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और सभी सहयोगी एकजुट हैं।

“हमारे रिश्ते दोस्ती और साझा लक्ष्यों पर आधारित हैं, न कि किसी राजनीतिक ‘बैसाखी’ पर,”
उन्होंने कहा।

फडणवीस ने आगे कहा कि अमित शाह का बयान इस बात पर ज़ोर देता है कि भाजपा की अपनी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक क्षमता है, जो किसी गठबंधन पर निर्भर नहीं करती।

“भाजपा आज अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन पर खड़ी है,” उन्होंने कहा।


फलटण आत्महत्या मामले पर विपक्ष को घेरा

मुख्यमंत्री फडणवीस ने सतारा जिले के फलटण में महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले पर विपक्ष द्वारा किए जा रहे बयानों की आलोचना की।
उन्होंने कहा,

“जो लोग ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण करते हैं, वे दुर्भाग्यशाली हैं। उन्हें केवल सुर्खियों में रहना है, न कि न्याय की चिंता।”

फडणवीस ने दोहराया कि इस मामले में किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
राज्य सरकार ने घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


मतदाता सूची पर विपक्ष के आरोपों का जवाब

मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा मतदाता सूची पर सवाल उठाने के मुद्दे पर भी पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष आगामी चुनावों में संभावित हार से डर गया है, इसलिए पहले से ही “बहाने बनाना” शुरू कर चुका है।

“हमने भी दोहरे नामों के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन विपक्ष इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं दे सका,”
फडणवीस ने कहा।

उन्होंने कहा कि पहले कभी विपक्षी दलों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल नहीं उठाए, लेकिन अब अपनी राजनीतिक असफलता को छिपाने के लिए आयोग पर आरोप लगा रहे हैं।


राजनीतिक संदेश — भाजपा आत्मनिर्भर, पर गठबंधन मजबूत

देवेंद्र फडणवीस के बयान ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भाजपा राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर पार्टी है, लेकिन अपने सहयोगियों के साथ समानता और सम्मान के रिश्ते को भी बनाए रखना चाहती है।
उनका बयान न केवल अमित शाह की टिप्पणी का समर्थन करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गठबंधन सरकार में कोई मतभेद नहीं हैं।

फडणवीस ने अंत में कहा कि महाराष्ट्र की जनता विकास, सुशासन और स्थिरता चाहती है — और यही तीनों बातें भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकता हैं।

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