प्रधानमंत्री कार्यालय और राजभवनों के नाम बदले गए, सेवा और जिम्मेदारी की नई दिशा!

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम अब ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। इसी कड़ी में देशभर के राजभवनों के नाम भी बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गवर्नेंस की सोच और प्रशासनिक संस्कृति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। सत्ता से सेवा और पद की ताकत से जिम्मेदारी की ओर यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र में नए दृष्टिकोण को दर्शाता है।

पीएमओ अब अपने 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक परिसर से नए एडवांस कैंपस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा, जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करता है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार ने कई सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलकर गवर्नेंस और कर्तव्य पर जोर दिया था। उदाहरण के लिए, राजपथ का नाम ‘कर्तव्य पथ’ रखा गया और प्रधानमंत्री आवास का नाम बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नए नाम सत्ता, अधिकार और विशिष्टता की भावना को कम कर जनता और जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

राजभवनों के नाम परिवर्तन के पीछे भी यही सोच है। पुराने नामों को औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक माना गया और अब राज्यपालों के कार्यालयों को ‘लोकभवन’ कहा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव मानसिकता में भी बदलाव लाएगा और शासन की भाषा को सेवा, कर्तव्य और नागरिक-केंद्रित बनाएगा।

इस पहल के साथ भारत के सार्वजनिक संस्थानों में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जो प्रशासन में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और जनता की सेवा को प्राथमिकता देगा।

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