ट्रंप के टैरिफ ने बढ़ाया भारत-अमेरिका तनाव, सांसदों ने चेताया—“गलत नीतियों का फायदा चीन-रूस उठा सकते हैं!

अमेरिका ने हाल ही में कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। इन टैरिफों से पैदा हुए व्यापारिक तनाव को कम करने के लिए दोनों देश लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा।

इस बीच अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर चिंता जताई है। यूनाइटेड स्टेट्स की प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने कहा कि टैरिफ न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने वाशिंगटन स्टेट की एक 120 साल पुरानी फैमिली-ओन्ड कंपनी का उदाहरण दिया, जो भारत से एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का व्यापार करती है और टैरिफ के कारण उत्पादन घटाने या ऑफ़शोर करने पर मजबूर है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कामगार-डोव ने भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने दशकों से मजबूत भारत-अमेरिका रिश्तों को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने 50% शुल्क और भारत पर रूसी तेल के आयात पर लगाए गए 25% टैरिफ की आलोचना की और चेताया कि इस तरह की गलत नीतियों का फायदा चीन और रूस जैसे देश उठाएंगे।

कामगार ने H-1B वीज़ा पर 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की नई फीस लगाने पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे भारतीय पेशेवरों को झटका लगेगा, जिन्होंने विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा और कला के क्षेत्र में अमेरिका को नई ऊंचाइयां दी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन नीतियों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो भारत जैसे रणनीतिक साझेदार अमेरिका से दूर हो सकते हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ेगा।

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