ISRO का 2026 का पहला मिशन विफल: थर्ड फेज में तकनीकी खामी से EOS-N1 सैटेलाइट कक्षा में नहीं पहुंच सका।
नए साल की शुरुआत में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार, 12 जनवरी 2026 को अपने पहले मिशन PSLV-C62 के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) को अंतरिक्ष में भेजा, लेकिन यह मिशन तकनीकी खामी के कारण असफल रहा। यह लॉन्चिंग सुबह करीब 10 बजकर 17 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से की गई थी।
PSLV-C62 रॉकेट ने तय समय पर उड़ान भरी और शुरुआती चरण सामान्य रहे। लॉन्च से पहले ऑटोमेटिक सीक्वेंस शुरू किया गया था, जिससे यह संकेत मिला कि सभी पैरामीटर अनुकूल हैं। लिफ्ट-ऑफ के बाद पहले और दूसरे चरण में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य बताया गया। हालांकि, तीसरे चरण के अंतिम हिस्से में आई तकनीकी खराबी के कारण मिशन अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका और EOS-N1 उपग्रह को तय कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
EOS-N1 एक उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान और पर्यावरण मॉनिटरिंग के लिए विकसित किया गया था। इस मिशन के सफल होने से रक्षा और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा मिलने की उम्मीद थी। इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के तहत इस मिशन में EOS-N1 के अलावा 14 अन्य सह-यात्री पेलोड भी शामिल थे, जिनमें देशी और विदेशी उपग्रह शामिल थे।
यह मिशन 2025 में आई असफलता के बाद PSLV के लिए एक अहम कमबैक माना जा रहा था। हालांकि, तकनीकी विफलता के बावजूद ISRO ने साफ किया है कि वह जल्द ही इस खामी का विश्लेषण कर भविष्य के मिशनों को और मजबूत बनाएगा। ISRO का कहना है कि असफलताओं से सीख लेकर भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
















































































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