2026 बंगाल चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, बाहरी राज्यों के अनुभवी नेताओं से संगठन मजबूत करने की कवायद!
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने अन्य राज्यों से अनुभवी नेताओं को “प्रवासी सदस्य” के तौर पर बंगाल में तैनात किया है, जिनका मकसद आंतरिक कलह को सुलझाना, कमजोर बूथों पर पकड़ मजबूत करना और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ प्रभावी चुनावी रणनीति तैयार करना है।
चुनाव से पहले बीजेपी की गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाल के महीनों में पार्टी के कई बड़े नेता बंगाल का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में बंगाल में जनसभा को संबोधित करते हुए टीएमसी पर तीखा हमला बोला था। बिहार में मिली जीत के बाद बीजेपी अब बंगाल में भी सत्ता हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, इसी क्रम में यह मास्टरस्ट्रोक खेला गया है।
पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक से आए वरिष्ठ नेता बंगाल में सक्रिय हैं। इनमें यूपी के मंत्री जेपीएस राठौर, उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत, राजस्थान भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष कैलाश चौधरी, यूपी के पूर्व मंत्री सुरेश राणा, हरियाणा भाजपा महासचिव संजय भाटिया और कर्नाटक के पूर्व मंत्री सी टी रवि शामिल हैं। ये नेता मंडल से लेकर जिला स्तर तक संगठनात्मक मतभेद दूर करने और चुनावी तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।
जेपीएस राठौर को 35 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सुरेश राणा 28 विधानसभा क्षेत्रों का प्रभार संभाल रहे हैं। संजय भाटिया को हुगली, श्रीरामपुर और हावड़ा क्षेत्र सौंपा गया है, वहीं कैलाश चौधरी उत्तर बंगाल के कई जिलों में तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं। ये सभी नेता राज्य प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को रिपोर्ट करते हैं।
बीजेपी का आकलन है कि सत्ता में आने के लिए उसे लगभग 5 प्रतिशत वोट शेयर बढ़ाना होगा। 2021 में बीजेपी को 37.97 प्रतिशत और टीएमसी को 48.02 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और 2026 में पहले से अधिक मजबूत संगठन के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है।
















































































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