MBMC चुनाव के बाद मेयर पद पर घमासान, ‘मराठी अस्मिता’ ने पकड़ा जोर!
मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुंबई से सटे इस नगर निगम में सत्ता किसके हाथ में होगी, इस पर मंथन जारी है, लेकिन इसी बीच भाषाई राजनीति ने माहौल गरमा दिया है। चुनाव परिणाम सामने आते ही ‘मराठी अस्मिता’ का मुद्दा फ्रंटफुट पर आ गया है। मराठी एकीकरण समिति और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने साफ कर दिया है कि मीरा-भायंदर में केवल मराठी मेयर ही स्वीकार होगा।
मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर चेतावनी दी कि यदि किसी गैरमराठी व्यक्ति को मेयर बनाया गया, तो वे महानगरपालिका के प्रवेश द्वार पर अपना खून बहाने को तैयार हैं। देशमुख ने कहा कि वे मराठी अस्मिता से समझौता नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन जैसा बड़ा रूप ले सकता है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण को ज्ञापन भी सौंपा है।
देशमुख की इस मांग को मनसे का भी खुला समर्थन मिला है। मनसे नेता अविनाश जाधव और शहराध्यक्ष संदीप राणे ने कहा कि मीरा-भायंदर में मराठी मेयर ही होना चाहिए। ‘खून बहाने’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अविनाश जाधव ने कहा कि खून बहेगा, लेकिन मराठी मानुस का नहीं होना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
इस विवाद की जड़ भाजपा नेता कृपाशंकर सिंह का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर भारतीय मेयर बनाए जाने की बात कही थी। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण दिया, लेकिन तब तक मुद्दा तूल पकड़ चुका था। गौरतलब है कि 2012 से MBMC पर भाजपा का कब्जा है और यहां हिंदी, गुजराती व राजस्थानी भाषी आबादी बड़ी संख्या में रहती है। मौजूदा चुनाव में भाजपा 44 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन मेयर पद को लेकर संघर्ष अभी थमता नजर नहीं आ रहा।
















































































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