फिरोज गांधी के ड्राइविंग लाइसेंस पर सियासी घमासान, राहुल गांधी के रायबरेली दौरे में उठा विवाद!
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के परदादा फिरोज गांधी का बताया जा रहा ड्राइविंग लाइसेंस सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला तब चर्चा में आया, जब राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान उन्हें यह लाइसेंस सौंपा गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने इस दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर थे। दौरे के दूसरे दिन रायबरेली प्रीमियर लीग के आयोजक मंडल से जुड़े विकास सिंह ने मंच पर उन्हें यह ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। विकास सिंह का दावा है कि यह लाइसेंस वर्षों पहले एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को अचानक मिला था। इसके बाद उनके ससुर और सास ने इसे सुरक्षित रखकर संभाला और अब इसे राहुल गांधी को सौंप दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस एक निजी दस्तावेज होता है, जो आमतौर पर परिवार या कानूनी वारिसों के पास रहता है। ऐसे में यह लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के पास कैसे पहुंचा, यह जांच का विषय है। उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि लाइसेंस वास्तविक है या फर्जी और इसकी वैधता क्या है।
दिनेश प्रताप सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए भी राहुल गांधी पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या यह मुद्दा रायबरेली की जनता को गुमराह करने या सस्ती लोकप्रियता के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि यह लाइसेंस किसी के घर में मिला था, तो इतने वर्षों तक इसे गांधी परिवार को क्यों नहीं सौंपा गया।
वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया कि अपने परदादा का ड्राइविंग लाइसेंस देखकर राहुल गांधी भावुक हो गए और उन्होंने तुरंत अपनी मां सोनिया गांधी को इसकी जानकारी दी। बताया गया है कि यह लाइसेंस वर्ष 1938 में जारी हुआ था, यानी करीब 88 साल पुराना है। अब देखना होगा कि इस मामले में जांच की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
















































































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