जाने क्या और कब लगता है 'शनि दोष', और इससे बचने के उपाय।   

शास्त्रों के अनुसार, शनि देव भगवान सूर्य तथा माता छाया के पुत्र हैं। इन्हें क्रूर ग्रह का श्राप उनकी पत्नी से प्राप्त हुआ था। इनका वर्ण कृष्ण है और यह कौए की सवारी करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे और बाल्यावस्था में ही भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लीन रहते थे। शनिवार के दिन को शनि को समर्पित किया गया है। शनिवार का दिन भी अपंने में बहुत खास माना जाता है। शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। जहां हर ग्रह ढाई महीने में या 45 दिन में अपनी चाल बदल लेता है, वहीं शनि ढाई वर्ष में अपनी चाल बदलते हैं। 

क्या होता है शनि दोष?
 * शनि का क्रोधित होना और ग्रह से दंडनायक देवता बनना शनि दोष कहलाता है।
 * शनि देव का किसी राशि में न्यायकर्ता के रूप में स्थान लेना शनि दोष उत्पन्न करता है। 

कब लगता है शनि दोष? 
* जब कुंडली में शनि वक्री (शनि के वक्री और अशुभ होने में अंतर) हो जाएं या शनि का स्थान नीच हो जाए तो शनि दोष लगता है। 
* वहीं, किसी जीव की हत्या करने के बाद भी कुडंली में शनि दोष लगना शुरू हो जाता है। 
* पत्नी का अपमान करने या उसके साथ अभद्र व्यवहार करने पर भी शनि दोष लगता है। 
* शनि पूजा के दौरान जानकर की गई भूल के कारण भी कुंडली में शनि दोष लगता है। 

शनि दोष के उपाय,
* शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं। 
* शनिवार के दिन शनि देव को उड़द की दाल चढ़ाएं। 
* शनिवार के दिन घर में शमी का अपुधा लगाएं।
* शनिवार के दिन शमी के पौधे की पूजा करें।  
* रोजाना किसी बुजुर्ग की सेवा अवश्य करें। 

 

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