हिन्दू धर्म के 'चार धाम यात्रा' कौन से है जाने इसके महत्व से जुडी बाते।
हिन्दू धर्म में चारधाम यात्रा का बड़ा ही धार्मिक महत्व माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, चारधाम की यात्रा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को दोबारा मृत्यु लोक में जन्म नहीं लेना पड़ता, वो मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है और इसी देवभूमि में स्थित हैं चार धाम। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से चार धामों के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों की संख्या इसलिए भी ज्यादा होती है क्योंकि चार धाम यात्रा साल में 6 महीनों के लिए ही चलती है। चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है हरिद्वार से। यात्रा का पहला दिन हरिद्वार से बारकोट या जानकी चट्टी होता है। और दूसरा दिन जानकी चट्टी से यमुनोत्री और उसी दिन यमुनोत्री से बारकोट। तो ऐसे में हमारी चार धाम की यात्रा में 9 से 10 दिन लग जाते है
भारत में 4 धाम कौन से हैं?
1 .. बद्रीनाथ।
2.. केदारनाथ।
3 .. गंगोत्री।
4 .. यमुनोत्री।
यह चार धामों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि चार धाम यात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, गंगोत्री की ओर बढ़ती है, केदारनाथ तक जाती है और अंत में बद्रीनाथ पर समाप्त होती है।या त्रा की शुरुआत पश्चिम से की जाती है और पूर्व में समाप्त होती है इसलिए भी सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किये जाते हैं। यमुनोत्री के दर्शन के बाद चार धाम यात्रा का दूसरा पड़ाव होता है गंगोत्री धाम। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ, चार धाम यात्रा का तीसरा पड़ाव है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव आज भी केदारनाथ धाम में निवास करते हैं। बाबा केदारनाथ के दर्शन करके मनोवांछित फलों की प्राप्ति श्रद्धालुओं को होती है। बद्रीनाथ धाम, चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव है। अलकनंदा नदी के तट पर स्थिति भगवान विष्णु का ये धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी पाप नष्ट होते हैं और ईश्वर के आशीर्वाद से जीवन में स्थिरता आती है।
















































































Leave Your Message